कई दिल खिले यहाँ और कई पड़े हैं मुश्किल में,
आबाद करूं हूँ दिल मैं भी अपना इस महफ़िल में,
चेहरों की इस किताब में, हर हर्फ़ में तेरी मेरी शक्ल बसी,
पैग़ामों में भेजो तस्वीरें, अल्फ़ाज़, अश्क़ और कभी हँसी,
छुपके बैठा नहीं है कोई, गोशा कोई नहीं है ख़ाली,
जवाबों की बनती हैं क़िस्ते, हो चाहे बस एक सवाली,
तस्वीरों की कहकशां करें हैं गर्दिश इन दिवारों पे,
हर फ़र्द चला है, घूम रहा है मुख़्तलिफ़ सईयारों पे,
एहसासों के इज़हार का ज़रिया, इनकार भी, इज़हार भी है,
जज़बातों के इस मजमे में, नए रिश्तों की पुकार भी है,
गुफ़तगुओं पे ना वक़्त का पहरा, ना मुल्कों की जदुद,
असलियत से ग़ाफ़िल होकर सबने बनाए मेजाज़ी वजूद,
मैं भी ढूंढ़ रहा हूँ ख़ुद को अपनों के लव्ज़ों में,
यहीं कहीं फ़ेना हुई है मेरी भी हस्ती इन हर्फ़ों में
कई दिल खिले यहाँ और कई पड़े हैं मुश्किल में,
आबाद करूं हूँ दिल मैं भी अपना इस महफ़िल में।