उफ़ यह रात कटती नही है, क्यों इतनी लम्बी है, दर्द भी तो जाता नही, रश्के दिल थमता नही है,
ज़या से लड़के रात है जीती, मैं भी हारा रात के आगे, मुझसे तनहा तन्हाई संभलती नही है,
तुम हो के मैं हूँ, जो जगा भी है सोया भी, न जाने किन बेमाने ख्वाबों में खोया है,
देखे गुलशन और जज़ीरे सेहराओं में, कौन न जाने, मैं हूँ क्या जो जागे जागे सोया है,
तुम तो नही हो, मैं ही होंगा, जो सूखे पत्ते सा भटके रात की अँधेरी शबनम से बचके,
मैं इतना रोया के अब डरता हूँ, गीली मिटटी, गिले पत्ते, गीली शबनम, हवा के गिले झोंकों से,
तुम घर आओ तो नींद भी लाना, बदले में चाहे जो दिल वो ले जाना, पर चैन भी ले आना ज़रा सा,
मैं नींद से मिल जाऊँगा, तुम आओगे खुश हो जाऊँगा, असर होगा मुझपे भी कुछ तेरी ज़या का,
खाक बनके उड़ती आवारा फिरे है मेरी मुसर्रत, कतराती मुझसे, मुझपे हँसे है मेरी मुसर्रत,
तुम आओगे, वो भी लौट आएगी, फिर क्यों शर्माएगी, तुम तो होगे, तुम उसकी चाहत, तुम मेरी राहत.
1 comment:
kya hai yeh sab?
Post a Comment